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बुधवार की आरती




आरतीमे उस उपास्य देवताकी स्तुती की जाती है, जिसकी पूजा या व्रत किया जाता है ।

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बुधवार की आरती

बुधवार की आरती

आरती युगलकिशोर की कीजै । तन मन न्यौछावर कीजै ॥टेक॥

गौरश्याम मुख निरखत लीजै । हरि का स्वरूप नयन भरि पीजै ॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा । ताहि निरखि मेरे मन लोभा ॥

ओढ़े नील पीत पट सारी । कुंजबिहारी गिरिवरधारी ॥

फूलन की सेज फूलन की माला । रत्‍न सिंहासन बैठे नन्दलाला ॥

मोरमुकुट कर मुरली सोहै । नटवर कला देखि मन मोहै ॥

कंचनथार कपूर की बाती । हरि आए निर्मल भई छाती ॥

श्री पुरुषोत्तम गिरिवर धारी । आरती करें सकल ब्रज नारी ॥

नन्दनन्दन बृजभानु किशोरी । परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ॥

Translation - भाषांतर

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Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-12-17T06:01:38.4492080Z
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