HOME|हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|भजन|भजनामृत|लीला गान|
लीला गान देखो री एक बाला जोगी लीला गान नाचे नन्दलाल नचावे हर
लीला गान - आज हरि आये विदुर -घर ...


’लीलागान’में भगवल्लीकी मनोमोहिनी मनको लुभाती है ।



14
लीला गान

आज हरि आये विदुर-घर पावणा ॥टेक॥

विदुर नहीं घर थी विदुरानी, आवत देखे सारंग पाणी ।

फूली अंग समावे न चिन्त्या, भोजन कहाँ जिमावणा ॥१॥

केला भोत प्रेमसों ल्याई, गिरी-गिरी सब देत गिराई ।

छिलका देत श्याम-मुख माही, लागे भोत सुहावणा ॥२॥

इतने माँय विदुरजी आये, खारे-खोटे वचन सुनाये ।

छिलका देत श्याम-मुख माँही, कहाँ गमाई भावना ॥३॥

केला लिया विदुर कर माँही, गिरी देत गिरधर मुख माँही ।

कहे कृष्णजी सुनो विदुरजी ! वो स्वाद नहीं आवणा ॥४॥

बासी-कूसी, रुखे-सूखे, हम तो विदुर जी ! प्रमके भूखे ।

शम्भु सखी धन-धन विदुरानी, भक्तन मान बढ़ावणा ॥५॥

Translation - भाषांतर

N/A
14
References : N/A
Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2009-02-15T22:55:29.1444354-05:00

Comments | अभिप्राय

Please join {Khapre.org} Group on facebook and to write on to our wall, participate in group discussions..

Connect to us