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कबीर के दोहे - वोही राम पछानोजी । मेरा क...



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कबीर के दोहे

हिंदी साहित्य में कबीर का व्यक्तित्व अनुपम है।
Kabir mostly known as "Weaver saint of Varanasi".

Content
कबीर के दोहे

वोही राम पछानोजी । मेरा कहना मानोजी ॥ध्रु०॥

परनारीकुं षंढ बना है पर निंदाकु बहिरा ।

परधन देखत अंधा हुवा जब आपका जग सारा ॥१॥

सदा रहत उदासी निंदा स्तुती न जाने कोई ।

ये धेनु ये बाघ न जाने सब सब आत्मा है भाई ॥२॥

भेद नाहीं अभेद हुवा मन राम भया जग सारा ।

कहत कबीरा सुन भाई साधु जनमों रहकर न्यारा ॥३॥

Translation - भाषांतर

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Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-07-16T19:01:44.0000000Z
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