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कबीर के दोहे - पंडत जमका करो बखान । ज्या...



Tags : kabirdoheकबीरदोहे

कबीर के दोहे

हिंदी साहित्य में कबीर का व्यक्तित्व अनुपम है।
Kabir mostly known as "Weaver saint of Varanasi".

Content
कबीर के दोहे

पंडत जमका करो बखान । ज्या दिन नहीं धरती आसमान ॥ध्रु०॥

ज्या दिन धरन गगन सुलपाणी । नहीं सुमेरे मंडना ।

एकविस सागर पसारा नहीं । नहीं रवि शशि भाना ॥१॥

ज्या दिन जोग जुगुत नहीं । पुजा नहीं सुमरन नहीं ध्याना ।

आडसट तीरथ ज्या दिन नहीं । नहीं सुबेद कुराना ॥२॥

गुणी गंधर्व मुनी देवता । नहीं बैकुंठ मैदाना ।

दश अवतार ज्या दिन नहीं । नहीं तीन लोक मंडाना ॥३॥

ज्योती स्वरूप निरंजन नहीं । नहीं सोत्रिगुण तपाना ।

यौही साहेब शेष भयी प्रगट भये । सोही पुरुष पुराना ॥४॥

कहे कबीर ताहेकूं खोजो पावो पद निरबाना ।

नही तो भूल भटकत मत फिरयो छांडो जुगका जाना ॥५॥

Translation - भाषांतर

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Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-07-16T21:31:58.0000000Z
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