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कबीर के दोहे - गोसय्या राम भटकी के आनी क...



Tags : kabirdoheकबीरदोहे

कबीर के दोहे

हिंदी साहित्य में कबीर का व्यक्तित्व अनुपम है।
Kabir mostly known as "Weaver saint of Varanasi".

Content
कबीर के दोहे

गोसय्या राम भटकी के आनी कानी फिरे ॥ध्रु०॥

घटमें गंगा घटमें जमुना घटमें तीरथ करे ॥ भटकी०॥१॥

घटमें दीवा घटमें सेवा घटमें ध्यान धरे ॥ भटकी०॥२॥

घटमें लुहा घटमें हरन घटमें घात धरे ॥ भटकी०॥३॥

घटमें तेल घटमें बत्ती घटमें जोत जले ॥ भटकी०॥४॥

कहत कबीरा सुन भाई साधु खोजो तो खबर पडे ॥ भटकी०॥५॥

Translation - भाषांतर

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Created by TransLiteral/ Courtsey {Khapre.org} on 2007-07-17T19:26:10.0000000Z
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