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पूजा-सामग्री और रखनेका प्रकार




ईश्वरोन्मुख होनेके बाद मनुष्यको परमात्माके वास्तविक तत्वक परिज्ञान होने लगता है और फिर वह सदा सर्वदाके लिये जीवमुक्त हो जाता है, इसीलिये सारे कर्म शास्त्रकी आज्ञाके अनुसार होने चाहिये ।

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पूजा-सामग्री और रखनेका प्रकार

पूजा-सामग्रीके रखनेका प्रकार

पूजनकी किस वस्तुको किधर रखना चाहिये, इस बातका भी शास्त्रने निर्देश दिया है । इसके अनुसार वस्तुओंको यथास्थान सजा देना चाहिये ।

बायी ओर - १. सुवासित जलसे भरा उदकुम्भ (जलपात्र) २. घंटा और ३. धूपदानी, ४. तेलका दीपक भी बायीं ओर रखे ।

दायीं और - १. घृतका दीपक और २. सुवासित जलसे भरा शङ्ख ।

सामने - १. कुङ्कुम (केसर) और कपूरके साथ घिसा गाढ़ा चन्दन, २. पुष्प आदि हाथमें तथा चन्दन ताम्रपात्रमें न रखे ।

Translation - भाषांतर

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