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आदमी का सैतान आदमी है


मनुष्य जातीचा शत्रु मनुष्यच.

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कालनिर्णयकोश VI. - व्यक्तियों का कालनिर्णय   दया धर्मका मूळ है   सैतान   आपना घर दूरसे सुझतां है   आपना वकर आपने हात है   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   है   बछडा-बछडा खुंटेके बळ नाचता है   दोनो हातो पगडी संभालाने पडी है   नंगेमे खुदाभी डरता है   अल्ला का दिया शिरपर   पके बडके तले, मरणेवाले है   दिलपर दिल ऐना है   बखतवारी उडगई है, बुलंदी रह गई है   नफा दिसता है, मुद्दल घुसता है   घोडक्या or का   साळंकृत का गिळंकृत   बम्मन-बम्मनकी गई बछडी, रावणकी गई लंक, दोनो दुःख समान है, ओ राजा ए रंक   आफडे का नाफडे   सो-सो कव्वोमे एक बगलाभी सरस है   बुरखा-का   धंटक (का)   नासलें मिरें का केजास महाग झालें?   कासविंदा का शिं दा   मारमारके जाय, फताहदाद इलाही है   जहांके मुरदे वहांही गाडते है   उंट बडबडातेही लादते है   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   आग पानीको हाडवैर है   मुफलस-मुफलससे सवाल हराम है   माझे हात का कोकणांत गेले?   ओ का ठो न करतां येणें   आधी करावा वाचे स्वीकार, मग का करावा तिरस्कार   कोंबडा नेला डोंगरा म्‍हणून का दिवस उगवत नाही?   आज है सो कल नही   महंत-जांके संग दसवीस है तांको नाम महंतः   फुरक्या or का   का म्हणून   (माझ्या) अंगीं का माशा मेल्या आहेत?   बाप पाहुणा आला म्हणून रेडा का दोहायाचा   जबान तले जबान है   घर सान जाल्‍ले तरी मन होड आस का   आबुला का डाबुला   दियाही आडे आता है   एक एक मुस्किलके, हजार हजार आसान रखे है   हा-हा मी का तो मी   हजार आफत है, एक दिल लगानेसें   साहेबका घर दूर है, जैसी लंबी खजूर l चढे तो चाहे प्रेम रस, गिरे तो चकना चूर ll   जब दांत न थे तब दूध दियो, जब दांत दिये तब अन्न न दे (अब दांत दिये का अन्न न दे हैं)   तन गेलें, पण गेलें, आतां काय उरली बाकी! तरुणपणाचा मित्र विचारी, खुशाल आहेस का काकी !   गद्धेभी जवानीमें, भले मालूम देते है   सोना-सोतेको सोता, कब जागता है   
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

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