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गंगा

The river Ganges or the personification of it as a goddess. 2 The river Godá or Godávarí. 3 A sacred stream gen. Pr. वाहती गंगा आणि चालता धर्म. 4 Water from a sacred stream or consecrated water, for sacred uses and purposes. गंगेंतलें पाणी गंगेंत सोडणें A phrase used humbly by a person in repaying kind offices. गंगेस घोडे नाहणें To accomplish a mighty undertaking or achieve some great feat. वाहते गंगेंत हात धुणें To take a part in, and thus seize a share of the merit of, some पुण्यकर्म that another is carrying on. वाहिली ती गंगा राहिलें तें तीर्थ Used of profuse and generous largesses or expenditure. Because both the money spent and the money saved will profit.
n.  एक स्वर्गीय देवी । एक समय सब देवियॉं ब्रह्मदेव के पास गयी । उनके साथ गंगा तथा इक्ष्वाकुकुलोत्पन्न महाभिष भी गया । यकायक इनके वस्त्र वायु के कारण उड गये । सब लोगों ने सिर नीचे कर लिया । परंतु महाभिष निःशंक इनकी ओर देखता रहा । यह देख कर ब्रह्माजी ने शाप दिया “तुम मृत्युलोक में जन्म लोगे एवं गंगा तुम्हारी स्त्री होगी । वह तुम्हें अप्रियसे कृत्य करेगी । तुम्हें इसके कृत्यों के प्रति क्रोध उत्पन्न होगा । तब मुक्त हो कर तुम इस लोक में आओगे” । शाप सुन कर महाभिष ने प्रतीप के पेट में जन्म लेने का निश्चय किया । वसिष्ठ के शाप के कारण मृत्युलोक में आने वाले अष्टवसु इसे राह में मिले । उन्होंने इसके पेट में जन्म लेने का निश्चय किया । परंतु उन्होंने यह शर्त रखी कि, जो भी पुत्र जन्म लेगा, इसे यह जल में छोड देगी । परंतु इसने भी यह शर्त रखी कि, जिससे मैं विवाह करुँगी उसे पुत्रेच्छा अवश्य रहेगी, इसलिये कम से कम एक पुत्र जीवित रहना ही चाहिये । तब अष्टवसुओं ने मान्य किया कि, अपने वीर्य से एक पुत्र वे इसे देंगे । वह वीर्यवान् परंतु निपुत्रिक रहेगा । भगीरथ स्वर्ग से अपने पितरों के उद्धार के लिये गंगा नीचे लाया । जब यह समुद्र की ओर जा रही थी, तब राह में जुह्र ने इसे प्राशन कर लिया, तथा पुनः छोड दिया (भगीरथ एवं जह्रु देखिये)। एकबार प्रतीप ध्यानस्थ बैठा था । तब गंगा पानी से बाहर आई तथा उसकी दॉई गोद में आ कर बैठ गई । यह देख कर उसने इसकी इच्छा पूँछी । इसने अपना स्वीकार करने के लिये कहा । तब दॉंई गोद में बैठने के कारण, स्नुषारुप में इसका स्वीकार करना उसने कबूल किया । गंगा ने अपनी शर्त रखीकि, आपकी स्नुषा होने के बाद, मैं जो कुछ भी करुँगी, उसके बारेमें अपका पुत्र कुछ भी हस्तक्षेप न करें । जब तक यह शर्त मान्य की जायेगी, तब तक आपके पुत्र का सहवास मैं मान्य करुँगी, तथा उसे सुख दूँगी । उसे पुण्यवान् पुत्र होंगे तथा उन्हीं के साथ उसे स्वर्गप्राप्ति होगी । इस प्रकार तय कर के गंगा अन्तर्धान हो गई । कुछ दिनों के बाद महाभिष ने प्रतीप के घर शांतनु नाम से जन्म लिया । बडा होने पर, उसें अपने पिता से सारा समाचार मालूम हुआ । बाद में गंगा शांतनु पास गई, तब उसने इससे विवाह किया । इसके कुल आठ पुत्र हुए । उनमें से सात को इसने पानी में डुबा दिया । आठवें पुत्र को शंतनु नेडुबाणे नहीं दिया । गंगा का आठवॉं पुत्र हे भीष्म है । बाद में उसे ले कर यह स्वर्लोक गई । वहॉं इसने सब प्रकार की शिक्षा उसे दी । शांतनु जब मृगया के हेतु आया, तब इसने भीष्म को उसे सौंप दिया [म.आ.९१-९३]। गंगा जान्हवी [म.उ.१७९.३];[ भी.११५.५२]। तथा भागीरथी [म.अनु.१३९.७]; आश्व. २.७ नामों से प्रसिद्ध है । भीष्म शांतनु को गंगाधार में पिंड दे रहा था । गंगा ने उसकी सहायता की [म.अनु.८४]। परशुराम से युद्ध करते समय, भीष्म के सारथी की मृत्यु हो गई । तब स्वयं घोडों को सम्हाल कर इसने भीष्म की रक्षा की [म.उ.१८३.१५-१६]। भीष्म ने अंबा का स्वीकार न करने के कारण, उसने तप कर के भीष्म वध के लिये पुरुषजन्म मॉंग लिया । एक बार नित्यक्रमानुसार, अंबा गंगास्नान करने गई थी, तब गंगा वहॉं आई । उसने इसे शाप दिया ‘तुम टेढी मेढी नदी बन कर केवल बरसात में ही बहोगी । अन्य दिनों में सूख जाओगी । बरसात में तुमारे पात्र में उतार भी नहीं मिलेगा’ [म.उ. १८७.३४-३५]। भीष्मवध के बाद इसके दुख का निरसन श्रीकृष्ण ने किया [म.अनु.२७४.२७ कुं.]। गंगा ने एकबार प्राचीमाधव नामक विष्णु से पूछा कि, ‘मुझमें पापी स्नान करते है । इन पापों से मेरी मुक्ति कैसी होगी?’ विष्णु ने इसे रोज पूर्ववाहिनी सरस्वती में स्नान करने के लिये कहा । परंतु गंगा को यह तापदायक प्रतीत हुआ । तब उसने इसे त्रिस्पृशा का व्रत करने के लिये कहा । उससे यह पापमुक्त हुई । एकादशी, द्वादशी तथा त्रयोदशी जिस एक तिथि को स्पर्श करते हैं, उस तिथि को त्रिस्पृशा कहते है । इस दिन सुवर्ण की विष्णुमूर्ति की पूजा की जाती है [पद्म. उ. ३४]
गंगा घेणें-उचलणें
गंगा हातात घेऊन शपथ करणें
गंगेच्या उदकाची शपथ घेणें.
 f  The river Ganges. Consecrated water.
गंगेत घोडे नाहणें   Accomplish a mighty undertaking.
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