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गद्धेभी जवानीमें, भले मालूम देते है


गाढवसुद्धां तरुणपणी चांगले खुबसुरत दिसते. गाढवाचे पिलूं मोठे गोजिरवाणें असते. तु०-प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी अप्सरा भवेत्‌।

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मालूम   बनिया-बनिया देते नहीं, पुरा तोल   दया धर्मका मूळ है   आपना घर दूरसे सुझतां है   आपना वकर आपने हात है   भले भले गेले गोते खात, झिंझुरटें म्हणे माझी काय वाट?   भले भले भागले आणि देवपूजेला लागले   बछडा-बछडा खुंटेके बळ नाचता है   है   दोनो हातो पगडी संभालाने पडी है   दिलपर दिल ऐना है   नंगेमे खुदाभी डरता है   पके बडके तले, मरणेवाले है   नफा दिसता है, मुद्दल घुसता है   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   बखतवारी उडगई है, बुलंदी रह गई है   एकसे दो भले   आपण भले तर जग भलें, आपण मेलों जग बुडालें   आवडतें व्हावें, तर भले असावें   मालूमदानद or मालूम मी दानद   आग पानीको वैर है   मिया गिरगये लेकिन् पाव तो उच्चा है   जहां सुई नही जाती, वहां मुसली चलाती है   काजीजी दुबले क्यौं? तो दुनियाकी फिकीर लगी है   जात खुदाकी बेअयब है   आपने गल्लीमे कुत्ताभी शेर है   महंत-जांके संग दसवीस है तांको नाम महंतः   साहेबका घर दूर है, जैसी लंबी खजूर l चढे तो चाहे प्रेम रस, गिरे तो चकना चूर ll   बम्मन-बम्मनकी गई बछडी, रावणकी गई लंक, दोनो दुःख समान है, ओ राजा ए रंक   सो-सो कव्वोमे एक बगलाभी सरस है   फतहा-फतहा दाद इलाही है   मरदका कान और औरतका थान, जितना दबावे उतनाहि सीत कम लगता है   सय्या-सैय्या भये कोतवाल अब किसकी डर है   मूरख मूरख राज करत है, पंडित फिरत भिकारी   जनाब, देहली तो बहोत दूर है   वली-वल्लीको वल्लीही पछानता है   दिल लगा गद्धीसे (मेंडकीसे), पद‍मीन क्या इयांट (चीज) है   हाथीका वोझा, हाथीही उठाता है   तूं इमानसे गाव, हम सोता है   जबान तले जबान है   आज है सो कल नही   दियाही आडे आता है   एक एक मुस्किलके, हजार हजार आसान रखे है   हजार आफत है, एक दिल लगानेसें   मारमारके जाय, फताहदाद इलाही है   जहांके मुरदे वहांही गाडते है   उंट बडबडातेही लादते है   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   आग पानीको हाडवैर है   मुफलस-मुफलससे सवाल हराम है   अब - अबतो पत्थर के नीचे हात दबा है   अल्ला दोमेसें एक देवे तो कबूल है   अल्ला यार है बेडा पार है   आग पानीको वैर है   आग पानीको हाडवैर है   आज है सो कल नही   आटा तोल, ठिकरी जलती है   आदमी का सैतान आदमी है   आपने आपने ख्यालमे सबही मस्त है   आपने गल्लीमे कुत्ताभी शेर है   आपने बछड्येके दांत कोसोसे मालूम होते है   आपना घर दूरसे सुझतां है   आपना वकर आपने हात है   उंट बडबडातेही लादते है   एक एक मुस्किलके, हजार हजार आसान रखे है   एक मच्छली सारी झीलको गंदाती है   काजीजी दुबले क्यौं? तो दुनियाकी फिकीर लगी है   कानमें तेल डाल बैठे है   खुदाके घरसे फिर आये है   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   गद्धीसे प्रीत जडी तो पद्मीन क्‍या है झ्याट   जनाब, देहली तो बहोत दूर है   जबान तले जबान है   जहांके मुरदे वहांही गाडते है   जहां सुई नही जाती, वहां मुसली चलाती है   जात खुदाकी बेअयब है   जो गरजता है, सो बरसता नही   जो दब जाता है, संसार उसेहि दबाता है   तूं इमानसे गाव, हम सोता है   दुनया भुकी मरती है, घी   दुनया है, और खुशामद है   दया धर्मका मूळ है   दियाही आडे आता है   दिलपर दिल ऐना है   दिल लगा गद्धीसे (मेंडकीसे), पद‍मीन क्या इयांट (चीज) है   दिल्ली तो बहोत दूर है   दोनो हातो पगडी संभालाने पडी है   नंगेमे खुदाभी डरता है   नफा दिसता है, मुद्दल घुसता है   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   पके बडके तले, मरणेवाले है   प्रीतकी रीत न्यारी है   प्रीत जडे मेंडकीसे पद्‌भिनी क्या माल-झ्यात है   फतहा-फतहा दाद इलाही है   बखतवारी उडगई है, बुलंदी रह गई है   बछडा-बछडा खुंटेके बळ नाचता है   बनिया तो कुछ देते बी नहिं, लेकिन आप कहते है पुरा तोल   बनिया भी आपना गूड छुपाकर खाता है   बम्मन-बम्मनकी गई बछडी, रावणकी गई लंक, दोनो दुःख समान है, ओ राजा ए रंक   बात रह जाती है, बखत नहीं रहता   
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

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