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गहूं कहे मेरा मोटा पेट, और मुझको खावे नगरका शेट

गहूं हे धान्य फार महत्त्वाचे असते व त्‍यास सर्व मोठमोठे खातात म्‍हणून फार गर्व वाटतो.

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और   गहूं कहे मेरा मोटा पेट, और मुझको खावे नगरका शेट   लुटीचे गहूं आणि बापाचें श्राद्ध   खाण तशी माती, गहूं तशी रोटी   चिंतासे चतुराई घटे, दुःखसे घटे शरीर। पापसे घटे लक्ष्मी, कहे दास कबीर।।   बाजरा-री-बाजरा (बाजरी) कहे मैं हूँ टीकला, और उखळ और मुसलके बीच लढूं एकला   शेट शृंगारसर बाजार उलगडो   नामे शाहा कमा खावे, नामे चोर मारा जावे   पेट भरना भीकसे, चलना अपने टेकसे   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   खानेके दांत और, देखनेके और   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   खानेकू मैं और लढनेकू मेरा बडा भाई   खानेकू (पीनेकू) मैं, और लढनेकू मेरा बडा भाई   आपनी और निभाय, वांकी वही जाने   देएंगे दिलाएंगे (और लवडा बतलाएंगे)   शेट-शेटांसाठीं प्रजापति जाळून घेणें   हातावर गहूं असणें   देउळची गेली घांट, गुरवाचें गेलें चर्‍हट (इयांट,शेट)   गांव न पुसे झ्याट, पण घरीं बायकोचा शेट   बीच-बीचमें मेरा चांदभाई   गांठ गिरासे मद पिवे, लोग कहे मतवाल।   कहे जमीनकी, सुने असमानकी   खाना पीना भरना पेट, चमडी जाने नाना शंकरशेट   रात माका पेट   फत्तरपर पाणी पडे, भीजे पण भीने नही, मूरखसे गीयान् कहे, बुझे पण रीझे नहीं   जिस मुखसे पान खावे, तिस मुखसे कोईल न चाबे   बाजारात गहूं, भट भटणीला ह्मणेः लाटणें पोळपाट धू   झूटा न बोले तो पेट फुले   घरमें घंटा और मिजाज बडी   बैद-बैद करे बैदाई, और चंगा करे खुदाई   हलवाई-हलवाईंकी दुकान, और दादाजीक फाते   तेली खसम करना, और रुखा खाना   हरोज-हरोज नया कुवा खोदना, और नया पानी पीना   दोन तोबे खाऊंगा और एक मेंढी लेउंगा   उपरका घडभाई, और निचेको अल खुदाई   घरमें नही बास, और नाम दुर्गादास   खोटा पैसा गांठका और नकटा बेटा पेटका   विद्वानोको शिंग नहीं, और मुर्खको पुच्छ नहीं   श्याम-शामसुंदर बेटी चुला फुंकने बैठी, और नकटा बेटा चावडीवर बैठा   घीणो पैसो और पैसोनी घी   सोनेका निवाला खिलाना, और शेरके नजरोसें देखना   पानी पिना छानके, और गुरुअ करना जानके   सो घाट और एक वसरी कांठ   करी (करे) चोरी, और शिरजोरी   भडभुंजा-भडभुंजे की लडकी और केसरका टिकला   घोडेकू तंग और अदमीकू वंग   रात गय और बातही गये   राईभर नाता और गारीभर आशनाई   धीरज धरम मितर और नार, आपतकाल परखते चार   
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