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ज्ञ

ज्ञानभद्र

n.  द्वापार युग का एक महायोगी । यह सौरष्ट्र में रहता था । एक बार अकाल पडने के कारण, लगातार वीस दिनों तक इसे, तथा इसकी पत्नी को उपवास करना पडा । एक पर्वत पर जा कर यह एक कुम्हडा ले आया । इतने में भारी वर्षा के कारण, भीगा हुआ एक गोप ठंड से ठिठुरते हुए इसके घर आया । वह बीस दिनों से भूखा होने के कारण, वह कुम्हडा इन्होने उस गोप को दिया । इससे वह संतुष्ट हो गया । बाद में उपवास के कारण, यह दोनों यकायक मृत हो गये । उससे दोनों को सायुज्यमुक्ति प्राप्त हुई [पद्म. क्रि.२५]

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