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ज्ञ

ज्ञानीसे ज्ञानी मिले वह बात बात और बात, गद्धासे गद्धा मिले वह लात, लात और लात

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लात   और   लात-थ   ईतालकी बात   शहाण्यास एक बात, मूर्खाला सारी रात   लात म्हणणें   रंडी-रंडी मिले तो संसारी, न मिले तो बर्मचारी   सज्जनकू सज्जन मिले तो चंदनेम कपूर, दुर्जनकू दुर्जन मिले तो भांगमे धत्तूर   जातीची खावी लात, परजातीचा नको भात   बाजरा-री-बाजरा (बाजरी) कहे मैं हूँ टीकला, और उखळ और मुसलके बीच लढूं एकला   देएंगे दिलाएंगे (और लवडा बतलाएंगे)   आपनी और निभाय, वांकी वही जाने   खानेके दांत और, देखनेके और   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   शंख अडोशी, शंख पडोशी, शंख शंखके भाई शंख घरके व्याह होई तो शंख मिले जावाई   अल्प ज्ञानी, मूर्खात मोठा मानी   वह   आगे लाथ, पीछे बात   मुरखकी सारी रात, चतरकी एकच बात   जात तशी बात, पैसा तसा हाट   अंदरकी बात राम जाने   आषकका घर नाशक, रंडीका घर पूना, जिसकू न मिले उन्ने, मालेगांव धुलिवेकू जाना   साधूसे साधू मिले तो होय दोन दोन बाता   प्यार बैठा गद्धीपर तो पद्मीन क्या बात   घीणो पैसो और पैसोनी घी   घरमें घंटा और मिजाज बडी   बैद-बैद करे बैदाई, और चंगा करे खुदाई   राईभर नाता और गारीभर आशनाई   धीरज धरम मितर और नार, आपतकाल परखते चार   खानेकू मैं और लढनेकू मेरा बडा भाई   खानेकू (पीनेकू) मैं, और लढनेकू मेरा बडा भाई   श्याम-शामसुंदर बेटी चुला फुंकने बैठी, और नकटा बेटा चावडीवर बैठा   हरोज-हरोज नया कुवा खोदना, और नया पानी पीना   पानी पिना छानके, और गुरुअ करना जानके   सोनेका निवाला खिलाना, और शेरके नजरोसें देखना   रात गय और बातही गये   सो घाट और एक वसरी कांठ   करी (करे) चोरी, और शिरजोरी   भडभुंजा-भडभुंजे की लडकी और केसरका टिकला   घोडेकू तंग और अदमीकू वंग   दोन तोबे खाऊंगा और एक मेंढी लेउंगा   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   खोटा पैसा गांठका और नकटा बेटा पेटका   विद्वानोको शिंग नहीं, और मुर्खको पुच्छ नहीं   हलवाई-हलवाईंकी दुकान, और दादाजीक फाते   उपरका घडभाई, और निचेको अल खुदाई   घरमें नही बास, और नाम दुर्गादास   तेली खसम करना, और रुखा खाना   मूर्खा स्वहिताचें गाणें, ज्ञानी लोक हिताहित जाणे   राजा मेहेरबान, गद्धा पेहेलवान   आगे लाथ, पीछे बात   खानेके दांत और, देखनेके और   प्यार बैठा गद्धीपर तो पद्मीन क्या बात   बात   लात   लोणकडी-लोणकडी थाप-बात   वह   सज्जनकू सज्जन मिले घडे ग्यानकी बात, दुर्जनकू दुर्जन मिले तो बुकी दो लात   
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

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