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सय्या-सैय्या भये कोतवाल अब किसकी डर है

आपला मित्रच कोतवालाच्या जागेवर असल्यावर मग भ्यावयाचें कोणाला ? आतां स्वैर वागण्यास कांही हरकत नाहीं.

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डर   सय्या-सैय्या भये कोतवाल अब किसकी डर है   कोतवाल   दया धर्मका मूळ है   आपना वकर आपने हात है   आपना घर दूरसे सुझतां है   नफा दिसता है, मुद्दल घुसता है   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   पके बडके तले, मरणेवाले है   दिलपर दिल ऐना है   नंगेमे खुदाभी डरता है   दोनो हातो पगडी संभालाने पडी है   बछडा-बछडा खुंटेके बळ नाचता है   बखतवारी उडगई है, बुलंदी रह गई है   उद्योग्याचें घर, सोडिती कोतवाल नाझर   उखलिमे सर दबातो धक्कोसे क्या डर   कर नाहीं त्‍यास डर कशाला   गादीवरून उतरला कोतवाल, झाला कवडीचा माल   कर नाहीं त्याला डर नाहीं   कोतवाल घोडा   आपने गल्लीमे कुत्ताभी शेर है   आग पानीको वैर है   मूरख मूरख राज करत है, पंडित फिरत भिकारी   मिया गिरगये लेकिन् पाव तो उच्चा है   जहां सुई नही जाती, वहां मुसली चलाती है   काजीजी दुबले क्यौं? तो दुनियाकी फिकीर लगी है   हजार आफत है, एक दिल लगानेसें   दियाही आडे आता है   एक एक मुस्किलके, हजार हजार आसान रखे है   आज है सो कल नही   जबान तले जबान है   मारमारके जाय, फताहदाद इलाही है   जहांके मुरदे वहांही गाडते है   उंट बडबडातेही लादते है   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   आग पानीको हाडवैर है   मुफलस-मुफलससे सवाल हराम है   जनाब, देहली तो बहोत दूर है   वली-वल्लीको वल्लीही पछानता है   दिल लगा गद्धीसे (मेंडकीसे), पद‍मीन क्या इयांट (चीज) है   हाथीका वोझा, हाथीही उठाता है   तूं इमानसे गाव, हम सोता है   बम्मन-बम्मनकी गई बछडी, रावणकी गई लंक, दोनो दुःख समान है, ओ राजा ए रंक   फतहा-फतहा दाद इलाही है   मरदका कान और औरतका थान, जितना दबावे उतनाहि सीत कम लगता है   है   साहेबका घर दूर है, जैसी लंबी खजूर l चढे तो चाहे प्रेम रस, गिरे तो चकना चूर ll   महंत-जांके संग दसवीस है तांको नाम महंतः   सो-सो कव्वोमे एक बगलाभी सरस है   जब दांत न थे तब दूध दियो, जब दांत दिये तब अन्न न दे (अब दांत दिये का अन्न न दे हैं)   अब - अबतो पत्थर के नीचे हात दबा है   अल्ला दोमेसें एक देवे तो कबूल है   अल्ला यार है बेडा पार है   आग पानीको वैर है   आग पानीको हाडवैर है   आज है सो कल नही   आटा तोल, ठिकरी जलती है   आदमी का सैतान आदमी है   आपने आपने ख्यालमे सबही मस्त है   आपने गल्लीमे कुत्ताभी शेर है   आपने बछड्येके दांत कोसोसे मालूम होते है   आपना घर दूरसे सुझतां है   आपना वकर आपने हात है   उखलिमे सर दबातो धक्कोसे क्या डर   उंट बडबडातेही लादते है   एक एक मुस्किलके, हजार हजार आसान रखे है   एक मच्छली सारी झीलको गंदाती है   कर नाहीं त्याला डर नाहीं   कर नाहीं, त्‍यास डर नाहीं   काजीजी दुबले क्यौं? तो दुनियाकी फिकीर लगी है   कानमें तेल डाल बैठे है   कोतवाल   खुदाके घरसे फिर आये है   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   गद्धेभी जवानीमें, भले मालूम देते है   गद्धीसे प्रीत जडी तो पद्मीन क्‍या है झ्याट   जनाब, देहली तो बहोत दूर है   जबान तले जबान है   ज्‍याला कर नाहीं, त्‍यास डर नाहीं   जहांके मुरदे वहांही गाडते है   जहां सुई नही जाती, वहां मुसली चलाती है   जात खुदाकी बेअयब है   जो गरजता है, सो बरसता नही   जो दब जाता है, संसार उसेहि दबाता है   डर   तूं इमानसे गाव, हम सोता है   तेरे पितर सरग भये   दुनया भुकी मरती है, घी   दुनया है, और खुशामद है   दया धर्मका मूळ है   दियाही आडे आता है   दिलपर दिल ऐना है   दिल लगा गद्धीसे (मेंडकीसे), पद‍मीन क्या इयांट (चीज) है   दिल्ली तो बहोत दूर है   दोनो हातो पगडी संभालाने पडी है   नंगेमे खुदाभी डरता है   नफा दिसता है, मुद्दल घुसता है   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   पके बडके तले, मरणेवाले है   पत्रास _   
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